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Semiconductor(सेमीकंडक्टर): मोबाइल से लेकर मिसाइल तक क्यों खास है हर जगह?

Semiconductor(सेमीकंडक्टर)

आज के डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टीवी जैसे गैजेट्स आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटा-सा चिप हमारे जीवन के हर क्षेत्र में कितना महत्वपूर्ण है? मोबाइल से लेकर मिसाइल तक, हर जगह सेमीकंडक्टर की अहम भूमिका है।

हम जानेंगे कि सेमीकंडक्टर क्या है, यह कैसे काम करता है और क्यों यह आधुनिक तकनीक की रीढ़ बन चुका है।

सेमीकंडक्टर क्या है?

सेमीकंडक्टर एक ऐसा पदार्थ होता है जो कंडक्टर (Conductor) और इंसुलेटर (Insulator) के बीच में काम करता है। यानी, यह जरूरत के हिसाब से बिजली को चालू या बंद कर सकता है। इसका सबसे आम उदाहरण सिलिकॉन (Silicon) है, जिससे कंप्यूटर चिप्स बनाए जाते हैं।

Semiconductorसेमीकंडक्टर1-1024x539 Semiconductor(सेमीकंडक्टर): मोबाइल से लेकर मिसाइल तक क्यों खास है हर जगह?
Photo: Electrical4U

सेमीकंडक्टर के प्रकार (Types of Semiconductors)

  1. इंट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर (Intrinsic) – शुद्ध रूप वाले, जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम।
  2. एक्सट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर (Extrinsic) – इसमें अशुद्धियाँ मिलाकर प्रदर्शन बेहतर किया जाता है।
    • N-Type (निगेटिव चार्ज वाले)
    • P-Type (पॉजिटिव चार्ज वाले)

सेमीकंडक्टर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:

1. इंट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर (Intrinsic Semiconductor)

इंट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर शुद्ध (Pure) अवस्था में होते हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का डोपिंग (Doping) नहीं किया जाता। इनकी चालकता तापमान पर निर्भर करती है—जितना अधिक तापमान, उतनी अधिक चालकता।

उदाहरण:

विशेषताएँ:

2. एक्सट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर (Extrinsic Semiconductor)

जब इंट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर में अशुद्धियाँ (Impurities) मिलाई जाती हैं, तो वे एक्सट्रिन्सिक सेमीकंडक्टर बन जाते हैं। इस प्रक्रिया को डोपिंग (Doping) कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:

A. N-टाइप सेमीकंडक्टर (N-Type Semiconductor)

इसमें पेंटावैलेंट (Pentavalent) अशुद्धियाँ जैसे फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), या एंटीमनी (Sb) मिलाई जाती हैं। ये अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन प्रदान करते हैं, जिससे चालकता बढ़ जाती है।

विशेषताएँ:

B. P-टाइप सेमीकंडक्टर (P-Type Semiconductor)

इसमें ट्राइवैलेंट (Trivalent) अशुद्धियाँ जैसे बोरॉन (B), गैलियम (Ga), या इंडियम (In) मिलाई जाती हैं। ये होल (Hole) बनाते हैं, जो धनात्मक आवेश के वाहक होते हैं।

विशेषताएँ:

सेमीकंडक्टर का उपयोग: मोबाइल से लेकर मिसाइल तक

Photo: Power & Beyond

1. इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स (Electronics & Gadgets)

2. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (Automobile Industry)

3. मेडिकल और हेल्थकेयर (Medical & Healthcare)

4. डिफेंस और मिसाइल टेक्नोलॉजी (Defense & Missile Technology)

भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग (Semiconductor Industry in India)

भारत अब “सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब” बनने की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के तहत सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों को बढ़ावा दिया है। कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट्स:

Photo: The Free Tech

भविष्य में सेमीकंडक्टर की भूमिका (Future of Semiconductors)

सेमीकंडक्टर(Semiconductors) हमारे जीवन का वो अदृश्य हीरो है, जो हमें आधुनिक तकनीक से जोड़ता है। चाहे मोबाइल फोन हो, स्मार्ट होम, सेना की ताकत या फिर अंतरिक्ष में उड़ान — हर जगह इसकी अहम भूमिका है। इसलिए कहा जा सकता है:

“जो सेमीकंडक्टर पर राज करेगा, वही भविष्य की तकनीक पर राज करेगा।”


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